क्या आप जानते हैं, हवा में मुस्कुराते चेहरों के पीछे क्या चलता है? केबिन क्रू का वो 'रोस्टर सिस्टम' जो तय करता है उनकी ज़िंदगी!

नमस्ते पाठकों !

जब हम हवाई जहाज़ में कदम रखते हैं, तो हमें हमेशा आत्मविश्वास से भरे, सलीकेदार और मुस्कुराते हुए केबिन क्रू मिलते हैं। हमें लगता है कि उनकी ज़िंदगी कितनी शानदार है—हर दिन नए शहर, अच्छा वेतन, और ग्लैमर! लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उनका काम कितना चुनौतीपूर्ण है?
हाल ही में, इंडिगो की एक एयर होस्टेस ने 'आज तक' को दिए इंटरव्यू में केबिन क्रू की ज़िंदगी का एक ऐसा पहलू उजागर किया है, जो हम यात्रियों की नज़रों से ओझल रहता है: उनका फ्लाइट रोस्टर सिस्टम (Flight Roster System)।

🤒 'बीमार हो या नहीं...' यह साबित करना पड़ता है!

यह सिस्टम सिर्फ यह तय नहीं करता कि आपको कल किस फ्लाइट पर जाना है; यह आपके निजी जीवन, आपकी नींद और आपके स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है।
         
'ऑफिस में दिखाना पड़ता है बीमार हो या नहीं...'- एयर होस्टेस ने बताया।

यह सुनकर झटका लगता है! अगर एक आम ऑफिस कर्मचारी बीमार हो जाए, तो वह एक कॉल करके छुट्टी ले सकता है। लेकिन केबिन क्रू के लिए, अगर आप इतने थके हुए हैं कि उड़ नहीं सकते, या आप सचमुच बीमार हैं, तो आपको यह साबित करने के लिए ऑफिस में फिजिकली उपस्थित होना पड़ सकता है। कल्पना कीजिए, बीमार होने पर भी आपको अपने मैनेजर के सामने खड़े होकर यह 'प्रमाणित' करना पड़े कि आप काम के लायक नहीं हैं! यह उनके काम के प्रति समर्पण और साथ ही, सिस्टम के दबाव को दर्शाता है।

कैसा होता है यह रोस्टर सिस्टम?

फ्लाइट रोस्टर एक जटिल शेड्यूलिंग सिस्टम है जो तय करता है कि कौन सा क्रू मेंबर कब और कहाँ उड़ेगा। यह कई चीज़ों को ध्यान में रखता है:

  • फ्लाइट घंटे (Flight Hours): DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) के नियम हैं कि एक क्रू मेंबर एक निश्चित समय में कितने घंटे उड़ान भर सकता है।
  • रेस्ट टाइम (Rest Time): दो उड़ानों के बीच क्रू को पर्याप्त आराम मिलना ज़रूरी है, ताकि वे अगली ड्यूटी पर पूरी तरह फ्रेश रहें।
  • वेतन और भत्ते: यह रोस्टर ही तय करता है कि किसे किस रूट के लिए कितना भत्ता मिलेगा।
यह सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सुरक्षा मानदंडों का पालन हो, लेकिन यह क्रू मेंबर्स की नींद के पैटर्न, सामाजिक जीवन और बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) को पूरी तरह बिगाड़ देता है। एक दिन सुबह 4 बजे ड्यूटी, अगले दिन रात 10 बजे—शरीर को तालमेल बिठाने का मौका ही नहीं मिलता।

अगली बार जब आप मुस्कुराता हुआ क्रू देखें...

अगली बार जब आप हवाई जहाज़ में बैठें और एक एयर होस्टेस आपको गर्मजोशी से 
'नमस्ते' कहे, तो याद रखिएगा:
  1. वह शायद कुछ घंटे पहले ही लंबी दूरी की फ्लाइट से उतरी होगी।
  2. उसकी नींद पूरी न हुई हो सकती है, लेकिन वह 'बीमार नहीं हूँ' यह साबित करके आई है।
  3. वह आपको सुरक्षित महसूस कराने के लिए अपनी निजी चुनौतियों को पीछे छोड़ चुकी है।
केबिन क्रू की ज़िंदगी सिर्फ ग्लैमर नहीं है; यह जिम्मेदारी, समर्पण, और मुश्किल परिस्थितियों में भी पेशेवर बने रहने का नाम है। इस दिवाली या अगले वेकेशन पर जब आप उड़ान भरेंगे, तो उन्हें सम्मान और सराहना ज़रूर दें। वे सचमुच में हवा के असली हीरो हैं!

आपके विचार क्या हैं? क्या यह रोस्टर सिस्टम बहुत कठोर है? नीचे कमेंट में बताएं!



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