क्यों ज़रूरी है यह कटौती?
रेपो रेट वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक (जैसे SBI, HDFC Bank, ICICI Bank) अपनी तात्कालिक जरूरतों के लिए RBI से पैसा उधार लेते हैं।
जब आरबीआई रेपो रेट घटाता है , तो बैंकों के लिए उधार लेना सस्ता हो जाता है। बैंकों को मिलने वाली यह सस्ती फंडिंग का सीधा लाभ उन्हें अपने ग्राहकों तक पहुँचाना पड़ता है।
आपकी EMI पर सीधा असर
यह कटौती सीधे तौर पर आपके लोन की मासिक किस्त (EMI) को प्रभावित करेगी:
- होम लोन (Home Loan): यह सबसे बड़ा लाभार्थी होगा। अधिकांश होम लोन अब EBLR (External Benchmark Linked Rate) या MCLR (Marginal Cost of Funds based Lending Rate) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट में कटौती से इन बेंचमार्क दरों में कमी आएगी, जिससे आपके लोन की ब्याज दरें घट जाएंगी।
- कार लोन (Car Loan) और पर्सनल लोन (Personal Loan): इन पर भी ब्याज दरें कम होंगी, जिससे नए लोन लेना अधिक आकर्षक हो जाएगा।
- मौजूदा ग्राहक: यदि आपका लोन ईबीएलआर (EBLR) या रेपो रेट से जुड़ा है, तो ब्याज दर में कमी का फायदा आपको जल्द ही, अगली रीसेट तिथि पर मिलना शुरू हो जाएगा।
यह कदम न केवल कर्जदारों को राहत देगा, बल्कि अर्थव्यवस्था में पैसे के प्रवाह को बढ़ाकर (Boosting Liquidity) उपभोक्ता खर्च और निवेश को भी प्रोत्साहित करेगा, जो आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
🇮🇳 अर्थव्यवस्था के लिए 'गुड न्यूज'
रेपो रेट में कटौती का फैसला यह संकेत देता है कि आरबीआई को महंगाई (Inflation) नियंत्रण में रहने की उम्मीद है और अब उसका ध्यान विकास दर (Growth Rate) को सहारा देने पर केंद्रित है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बनी हुई है, और यह घरेलू मांग को मज़बूती देने में मदद करेगा।
संक्षेप में, यह आरबीआई की ओर से 'गुड न्यूज' है। तैयार हो जाइए, क्योंकि अब आपके लोन की EMI कम होने वाली है!

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